Author: Punya Prasun Bajpai

सीबीआई, सीवीसी, सीईसी, रिजर्व बैंक और सरकार, साहेब देश ऐसे तो नहीं चलता है

सीबीआई, सीवीसी, सीईसी, रिजर्व बैंक और सरकार, साहेब देश ऐसे तो नहीं चलता है

Media, News, Politics
सीबीआई, सीवीसी, सीआईसी, आरबीआई और सरकार। मोदी सत्ता के दौर में देश के इन चार प्रीमियर संस्थान और देश की सबसे ताकतवर सत्ता की नब्ज पर आज की तारिख में कोई अंगुली रख दे तो धड़कने उसकी अंगुलियों को भी छलनी कर देगी। क्योंकि ये सभी ऐसे हालात को पहली बा
लोकतंत्र हडपने पर जब सत्ता आमादा हो तब सुप्रीम कोर्ट को ही पहल करनी पडेगी

लोकतंत्र हडपने पर जब सत्ता आमादा हो तब सुप्रीम कोर्ट को ही पहल करनी पडेगी

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पत्रकार का सवाल। राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा। पत्रकार को व्हाइट हाउस में घुसने पर प्रतिबंध। मीडिया संस्थान सीएनएन का राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ अदालत जाना। देश भर में मीडिया की आजादी का सवाल उठना। अदालत का पत्रकार के हक में फैसला देना। ये दुनिया
देश के लिये महत्वपूर्ण हो चला है विधानसभा चुनाव से लोकसभा चुनाव तक का रास्ता

देश के लिये महत्वपूर्ण हो चला है विधानसभा चुनाव से लोकसभा चुनाव तक का रास्ता

Media, News, Politics
किसान की कर्ज माफी और रोजगार से आगे बात अभी भी जा नहीं रही है। और बीते ढाई दशक के दौर में चुनावी वादो के जरीये देश के हालात को समझे तो सडक बिजली पानी पर अब जिन्दगी जीने के हालात भारी पड रहे है। और ऐसे में से सवाल है कि क्या वाकई सत्ता संभालने के
पुण्य प्रसून बाजपेयी: अमेरिकी मीडिया बनाम भारतीय मीडिया यानी लोकतंत्र के दो चेहरे

पुण्य प्रसून बाजपेयी: अमेरिकी मीडिया बनाम भारतीय मीडिया यानी लोकतंत्र के दो चेहरे

Media, News
मौजूदा वक्त में जिन हालातो से भारतीय मीडिया दो चार हो रहा है या फिर पत्रकारो के सामने जो संकट है उस परिपेक्ष्य में अमेरिकी मीडिया का ट्रंप की सत्ता से टकराना दुनिया के दो लोकतांत्रिक देशो की दो कहानिया ही सामने लाता है। और दोनो ही दिलचस्प है। क्य
पूंजी निवेश के जरिए उपनिवेश बनाने का प्रतीक है श्रीलंका संकट – पुण्य प्रसून बाजपेयी

पूंजी निवेश के जरिए उपनिवेश बनाने का प्रतीक है श्रीलंका संकट – पुण्य प्रसून बाजपेयी

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पडौसी देशो के कतार में पहली बार श्रीलंका में राजनीतिक संकट के पीछे जिस तरह चीन के विस्तार को देखा जा रहा है, वह एक नये संकट की आहट भी है और संकेत भी कि अब वाकई युद्द विश्व बाजार पर कब्जा करने के लिये पूंजी के जरीये होगें ना कि हथियारो के जरीये। य