अमरीका में 90 दिनों में मिल जाती है सरकारी नौकरी, क्या भारत के नौजवानों को नहीं चाहिए नौकरी

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व्हाट्स एप पर एक मित्र कुलदीप से बात हो रही थी । उन्होंने अमरीका के पत्रकार स्टीवन ब्रिल की किताब टेलिस्पिन का हवाला देते हुए बताया कि अमरीका में सरकारी नौकरी की प्रक्रिया काफी जटिल और थका देने वाली है। मुझे लगा कि वहां भी तीन चार साल में भर्ती पूरी होती है। मगर ब्रिल ने कोफ्त जताते हुए लिखा है कि औसतन एक सरकारी नौकरी की प्रक्रिया पूरी होने में 90 दिन लग जाते हैं. जबकि प्राइवेट कंपनियों में 23 दिन। स्टीवन ब्रिल 90 दिन को ही थका देने वाला और जटिल मान रहे थे। सोचिए भारत में हम लोग क्या करें। जहां कोई इम्तहान ही समय पर नहीं होता है।

भारत के नौजवान भी यह जान कर स्तब्ध रह जाएंगे। उन्हें पता है कि कुछ नहीं होने वाला है क्योंकि उनका अनुभव बार बार उन्हें साबित कर देता है। ऐसी बात नहीं है कि नौजवानों ने नेताओं पर दबाव नहीं डाले या धरना प्रदर्शन नहीं किए, नेताओं ने भी वादे किए मगर सत्ता में आने या चले जाने के बाद भी चयन आयोगों की हेंकड़ी और नकारेपन में कोई कमी नहीं आई। ऐसा अपने आप से नहीं होता है बल्कि अब लगने लगा है कि सरकारों ने नौकरी समय पर न देने बल्कि नहीं देने की अच्छी तरकीब निकाल ली।

एक दिन कुछ नौजवान मिलने आए। पूरी फाइल तैयार कर लाए थे और कहा कि बिहार में 17 साल में बिहार लोक सेवा आयोग 7 परीक्षाएं भी नहीं करा सका है। इन परीक्षाओं के चक्कर में फंसे युवाओं की जवानी बर्बाद हो चुकी है। झारखंड का भी यही हाल है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और मध्य प्रदेश का भी वही हाल है। इन आयोगों के हवाले से अगर आप हिन्दुस्तान के युवाओं को समझेंगे तो बहुत आसानी से देख पाएंगे कि सरकार चाहे तो नौजवानों को जैसे मर्ज़ी उल्लू बना सकती है और नौजवान बनकर दिखा भी देते हैं। उनमें से आधे से ज्यादा सरकार को सरकार की तरह नहीं बल्कि अपने धर्म, अपनी जाति के नेताओं की सरकार के रूप में देखते हैं। इसीलिए उनका आंदोलन होता है तो उसी में से कुछ लोग उसकी धार कम करने में लगे रहते हैं। सबकी लड़ाई अकेले की हो गई है। सब मिलकर कर लड़ते तो शायद एक ईमानदार व्यवस्था भी हासिल कर लेते।

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आज किसी ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सीबीआई जांच 6 महीने से चल रही है मगर अभी तक कोई नतीजा नहीं आया है। लोक सेवा आयोग का वार्षिक परीक्षा कैलेंडर भी ध्वस्त हो गया है। इस साल की अपर सर्बोडिनेट परीक्षा का प्रीलिम्स 19 अगस्त 208 को होनी थी। लेकिन उसकी तारीख़ बढ़ते-बढ़ते 28 अक्तूबर 2018 पहुंच गई है। यही नहीं अपर सर्बोडिनेट परीक्षा 2016 के नतीजे भी अभी तक नहीं आए हैं।

जम्मू कश्मीर लोक सेवा आयोग के छात्र मुझे लिख रहे हैं कि आयोग ने परीक्षा की प्रणाली में बदलाव तो कर दिया लेकिन नए पैटर्न के हिसाब से तैयारी करने का सबको मौका नहीं दिया। जम्मू कश्मीर कंबाइंड कॉम्पिटिव परीक्षा 2018 का प्रीलिम्स 2 सितंबर को होने जा रहा है। जबकि 2017 की मेन्स की परीक्षा 12 अगस्त को ख़त्म हुई है। 2017 की परीक्षा में शामिल होने वाले दस हज़ार छात्रों को नए पैटर्न के साथ तैयारी के लिए वक्त नहीं दिया जा रहा है। उनके पास मात्र 24 दिन है। करीब 10,000 छात्र इस फैसले से प्रभावित हैं।

किसी ने पटना से सिटी भास्कर की क्लिपिंग भेजी है। उस ख़बर में लिखा है कि बिहार स्पेशल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (BSTET) पास होने के बाद भी 53, 500 अभ्यर्थी स्कूलों में नियुक्ति का इंतज़ार कर रहे हैं। 2019 तक इनकी नियुक्ति नहीं हुई तो इनकी वैधता समाप्त हो जाएगी। इन्हें फिर से BSTET की परीक्षा देनी होगी। जुलाई 2011 में BSTET की परीक्षा निकली थी। 12 लाख अभ्यर्थियों ने 60 रुपये देकर फार्म भरे थे। नवंबर 2011 में परीक्षा हुई। जून 2012 में रिजल्ट निकला। एक साल निकल ही गया। 68,500 अभ्यर्थी परीक्षा में पास हुए। परीक्षा पास कर छह महीने तक नियुक्ति की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।

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BSTET के बाद 2012 में 17,500 पदों पर हाई स्कूल में और 17,587 प्लस टू स्कूलों में शिक्षकों की बहाली होनी थी लेकिन कई चरणों के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। अंतिम भर्ती मई 2016 में हुई थी। अगर चयन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो मार्च 2019 में उनके पास होने की वैधता समाप्त हो जाएगी। बिहार में हाई स्कूल और प्लस टू स्कूलों में 19000 शिक्षकों की कमी है।

मैं नहीं कहता कि 50,000 से अधिक शिक्षकों को मीडिया की ज़रूरत नहीं है, बिल्कुल है और भास्कर ने इसे छापा भी। फिर भी इतनी बड़ी संख्या की कोई हैसियत नहीं है। इसी संख्या के बराबर रैली करने के लिए नेता लोग नोट बांट कर भीड़ जुटा लेते हैं जिस पर मीडिया ही हफ्तों चर्चा करता है। कई बार लोग पूछते हैं कि क्या करें, तो मेरे पास भी वाकई कोई जवाब नहीं होता है।

यूपी पुलिस का अलग से भर्ती बोर्ड है। इसकी तीन भर्तियां निकली थीं। दो भर्तियां 2016 की और एक सितंबर 2017 की। सितंबर 2017 की परीक्षा हुई मगर जनवरी में इस परीक्षा को रद्द घोषित कर दिया गया। जनवरी से अगस्त बीत गया मगर दोबारा परीक्षा कब होगी, पता नहीं है। यूपी पुलिस में कंप्यूटर आपरेटर का इम्तहान देने वाले नौजवान साधारण तबके से आते हैं। जैसे तैसे जतन कर परीक्षा देने गए थे। अब रद्द हो गई है और उम्र बीती जा रही है। इसमें भी हज़ारों छात्र शामिल हुए थे।

मध्य प्रदेश के अखबारों में भी चयन आयोगों के घोटाले की खबरें छप रही हैं। राज्य लोक सेवा परीक्षा 2012 के पर्चे लीक होने का मामला 2018 में भी जांच में उलझा हुआ है। इसकी जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाया गया था जिसने कोर्ट से कहा है कि पर्चे लीक हुए थे। 23 उम्मीदवारों को इससे लाभ मिला था। नई दुनिया इंदौर ने लिखा है कि सीबीआई ने 2014 में पीएससी के आर्युवेद चिकित्सा अधिकारी की परीक्षा के पर्चे लीख करने का मामला पकड़ा था। इसी गिरोह ने बताया है कि उसने 2012 के प्री और मेन्स के पर्चे लीक किए थे।

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अभी मध्य प्रदेश से छात्र लिख रहे हैं कि मध्य प्रदेश वन सेवा की अंतिम उत्तर कुंजी फिर से ग़लत है। जबकि सतना से किसी ने लिखा है कि हम लोगों ने 100 रुपये प्रति प्रश्न फीस देकर आपत्ति दर्द कराई थी। कई छात्रों ने 800 रुपये जमा कराए हैं, प्रमाण दिया है कि कैसे आयोग के उत्तर ग़लत हैं मगर कोई सुनवाई नहीं। आयोग ने अपने उत्तर को सही बता दिया है।

एक दिन यूं ही मेसेज आने लगे कि हम सभी भारत सरकार के टकसाल, हैदराबाद के लिए चुने जा चुके हैं। हमने जून 2017 को जूनियर टेक्निशियन पद की परीक्षा दी थी। 14 अगस्त 2017 को रिज़ल्ट आया। उसके बाद वेरिफिकेशन के लिए दस्तावेज़ मांगे गए। हम इन सारे प्रमाण पत्रों के साथ 9 अक्तूबर 2017 को हैदराबाद बुलाए गए। वहां आश्वासन मिला कि एक माह में नियुक्ति पत्र मिल जाएगा। अक्तूबर से अगस्त बीत गया मगर नियुक्ति पत्र नहीं आया है। झांसी, पटना से छात्रों ने हमें लिखा है।

काश मेरे पास पर्याप्त संसाधन होता। आज ही मुझे दस अलग-अलग मुद्दों को लेकर फोन आए। सबके सब अर्जेंट। परेशान हैं। फोन लगातार बजता रहता है। धीरे धीरे उठाना कम कर दिया हैं। कितनी बार लिखूंगा और बोलूंगा कि मैं सारी समस्याओं के साथ इंसाफ नहीं कर सकता। मेरे पास कोई सचिवालय नहीं है। पर इसका एक ही मतलब है कि नौजवान बहुत परेशान है। उसे हिन्दू मुस्लिम की गोली देकर उलझा दिया गया है। उसे भी इसमें नशा आता है। वर्ना जिस स्तर पर नौजवानों को धक्का दिया जा रहा है, उनकी आंधी में कोई भी तिनके की तरह उड़ जाए।

नोट- आई टी सेल इन समस्याओं को उठाए। ज़ोर शोर से मंत्रियों से पूछे कि यूपी के TET अभ्यर्थियों को नौकरी कब मिलेगी? उनकी संख्या एक लाख है। पौने दो लाख शिक्षा मित्र हैं। क्या उन्हें इनका वोट नहीं चाहिए? इन लोगों ने सरकारों का क्या बिगाड़ा है कि उन्हें नौकरी न देने की सज़ा दी जा रही है।

(यह लेख रविश कुमार के फेसबुक पेज से लिया गया है।)

 

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