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अमरीका में 90 दिनों में मिल जाती है सरकारी नौकरी, क्या भारत के नौजवानों को नहीं चाहिए नौकरी

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व्हाट्स एप पर एक मित्र कुलदीप से बात हो रही थी । उन्होंने अमरीका के पत्रकार स्टीवन ब्रिल की किताब टेलिस्पिन का हवाला देते हुए बताया कि अमरीका में सरकारी नौकरी की प्रक्रिया काफी जटिल…

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‘ना गुजरात दंगों में बीजेपी थी ना सिख दंगों में कांग्रेस रही” – पुण्य प्रसून बाजपेयी

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बात 28 फरवरी 2002 की है। बजट का दिन था। हर रिपोर्टर बजट के मद्देनजर बरों को कवर करने दफ्तर से निकल चुका था। मेरे पास कोई काम नहीं था तो मैं झंडेवालान में वीडियोकान…

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हम तुम्हारी हर झूठ पर भारी पड़ते हैं, भांडा फोड़ देते हैं – रवीश कुमार

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और इस तरह आप धीरे धीरे बदलते चले जाएँगे। नफ़रतों से सामान्य होना कितना सहज हो चुका है। मैं केरल नहीं गया। जाता तो ग़लत नहीं होता। उसके बाद भी किसी मदद करने वाले के…

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मैंने एक देश एक चुनाव पर एक भी बहस क्यों नहीं की – रवीश कुमार

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मैंने एक भी प्राइम टाइम एक देश एक चुनाव थीम पर नहीं किया। एक भी लेख नहीं लिखा। जहां तक मेरी याद्दाश्त सही है, मैंने इस मसले पर न तो कोई शो किया न ही…

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