हम तुम्हारी हर झूठ पर भारी पड़ते हैं, भांडा फोड़ देते हैं – रवीश कुमार

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हम तुम्हारी हर झूठ पर भारी पड़ते हैं, भांडा फोड़ देते हैं – रवीश कुमार

और इस तरह आप धीरे धीरे बदलते चले जाएँगे। नफ़रतों से सामान्य होना कितना सहज हो चुका है। मैं केरल नहीं गया। जाता तो ग़लत नहीं होता। उसके बाद भी किसी मदद करने वाले के चेहरे पर मेरा चेहरा लगाकर इस तरह से पेश किया जा रहा है ताकि कम दिमाग़ के लोग मान बैठे कि केरल जाना या बाढ़ पीड़ितों की मदद करना ग़लत है। कम दिमाग़ वालों में ऐसी मूर्खता होगी ही इसी भरोसे धारणा फैक्ट्री से ऐसी सामग्री बनाई जाती है। सोचिए जिसकी जगह मेरा चेहरा लगा है वह कितना अच्छा होगा। अपने कंधे पर एक बच्चे को बिठाकर ले जा रहा है। यह उस बंदे का अपमान है। हम समाज में ऐसे लोगों को तैयार कर रहे हैं जो इस तरह के झाँसे में आ रहे हैं।

आपकी सोच की बुनियाद बदली जा रही है। आप रोबोट की तरह इनकी फ़ीड की गई सामग्री के अनुसार व्यवहार करने लगेंगे। रोबोट बनाने वाले कब आपके दिमाग़ से भारत का एक राज्य, भारत का एक समाज ग़ायब कर देंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा। आप बस बीप बीप करते रह जाएँगे। एक दिन ये आपको भी कम कर देंगे। इनके पास तर्क नहीं हैं। तथ्य भी नहीं हैं। इसलिए झूठ इनका मुख्य भोजन है। जब विश्व गुरु के सपने बेचने वालों का गुरू ही झूठ बोलता है तो उसके लिए चेलों की फ़ौज दस गुना ज़्यादा झूठ बोलेगी ही।

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कल यानी रविवार को एन डी टी वी चैनल पर दोपहर तीन बजे से रात के नौ बजे तक केरल की मदद के लिए विशेष अभियान चलेगा। मैं नहीं हूँ वरना जमकर केरल के लिए मदद माँगता। जिन लोगों ने ये हरकत की है, उनकी सोच को हराइये। दस रुपया ही सही मगर दीजिए। ये नफ़रत आपको दंगाई बना रही है। हमारी मोहब्बत आपको इंसान बनाएगी। हमारे साथ आइये। कमेंट बाक्स में ये क्या लिखते हैं, इसकी चिन्ता न करें। आप किसी को डराने का अधिकार मत दीजिए। बहुत हो गया। बोलना सीखिए। अब बस।

क्या यही भारत बनाना चाहते हैं आप ? पढ़िए कमेंट बॉक्स के कमेंट। सोचिए एक बार। गुंडों लंपटों की भाषा बोलने वालों को आप कब से गले लगाने लगे।

(यह लेख रविश कुमार के फेसबुक पेज से लिया गया है।)

 

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